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“‘अपना राम खोजो’, समाज के दबाव में मत झुको – उपासना कामिनेनी कोनीडेला”
उपासना कामिनेनी कोनीडेला हमेशा से महिलाओं की बेहतरी के लिए आवाज़ उठाती रही हैं। वे महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने, काम करने और अपनी पहचान बनाने के लिए प्रेरित करती हैं।
हाल ही में उन्होंने एक पोस्ट में अपनी सोच साझा की कि आज की पीढ़ी को शादी को सिर्फ़ निभाना नहीं, बल्कि उसे नए तरीके से परिभाषित करना चाहिए। उनके अनुसार, शादी प्यार, भावनात्मक परिपक्वता, स्थिरता, आपसी सम्मान और सामर्थ्य पर आधारित एक सोच-समझकर लिया गया फैसला होना चाहिए — कोई ऐसा बंधन नहीं जो समाज के दबाव में किया जाए।
उपासना ने महिलाओं से कहा कि वे जल्दबाज़ी न करें और ‘अपना राम खोजें’, यानी ऐसा जीवनसाथी चुनें जो उन्हें सम्मान और बराबरी दे।
उन्होंने यह भी कहा कि लड़कों को शुरू से ही सिखाना चाहिए कि वे अपनी भावनाओं को कैसे संभालें, सीमाएं तय करें और दूसरों का सम्मान करें। साथ ही उन्होंने महिलाओं पर शादी की समयसीमा थोपने का विरोध किया और उन्हें अपनी पसंद से जीवन जीने की आज़ादी देने की बात कही।
उनकी बातों में यह भी शामिल था:
“अगर हम एक मजबूत भारत बनाना चाहते हैं, तो हमें सबसे पहले अपने घरों को मजबूत बनाना होगा। शिक्षित और जागरूक महिलाएं इस बदलाव की मुख्य कड़ी बन सकती हैं। अब समय है कि महिलाएं डर से नहीं, ताकत से शादी करें। पैसे या स्टेटस के लिए शादी करना ज़रूरी नहीं — ये सब सही जीवनसाथी के साथ मिलकर भी पाया जा सकता है।”
“एक ऐसा नया भारत बनाएं, जहां लोग मजबूरी में नहीं, अपनी पसंद से जीवनसाथी चुनें। जहां परंपरा और प्रगति साथ चलें। जहां शादी आपसी सम्मान पर हो, न कि बलिदान पर।”
उन्होंने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की एक क्लास का ज़िक्र करते हुए बताया कि वहां यह सवाल उठा — “आज की महिलाएं शादी क्यों करती हैं? साथ चाहिए? बच्चे? सामाजिक दर्जा?”
इस पर उन्होंने कहा:
“अब महिलाएं शादी की मोहताज नहीं हैं। अब यह किसी की ज़रूरत नहीं, बल्कि ऐसा साथी चुनने का विषय है जो आपको बराबरी और सम्मान दे।”
उपासना की यह सोच आज की आत्मनिर्भर और जागरूक महिलाओं की नई सोच को दर्शाती है — जो शादी को समझदारी से चुनती हैं, ना कि सामाजिक दबाव में।


